अण्डा थाना घेराव: शराब कार्रवाई पर बवाल, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, जांच का आश्वासन
संपादक -- एम डी युसुफ खान -- अंडा -दुर्ग Ⓜ️ 9179799491

अण्डा (दुर्ग)। थाना अण्डा पुलिस द्वारा 13 जून 2026 को जंजगिरी तिराहा में सार्वजनिक स्थान पर शराब सेवन के आरोप में चार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कार्रवाई से नाराज दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने थाना अण्डा पहुंचकर घेराव किया और पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार, मारपीट तथा कथित रूप से डेढ़ हज़ार रुपये लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों ने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि गांव के एक पूर्व सरपंच के साथ कथित रूप से थप्पड़ मारने जैसी घटना हुई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उन्होंने शराब सेवन किया था, लेकिन उनके पास से कोई बड़ी मात्रा में शराब बरामद नहीं हुई थी। उनका आरोप है कि बिना किसी मशीन या वैज्ञानिक परीक्षण के उन्हें रास्ते में रोककर पुलिस वाहन में बैठाकर थाना लाया गया तथा उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
विवाद के केंद्र में जंजगिरी निवासी तेजय कुमार देशमुख (43 वर्ष), गुणवंत लाल साहू (57 वर्ष), महेश कुमार साहू (43 वर्ष) तथा बोरीगारका निवासी अरविंद साहू (35 वर्ष) हैं, जिनके विरुद्ध थाना अण्डा पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 36(च) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
*पुलिस का पक्ष*
पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर जंजगिरी तिराहा में सार्वजनिक स्थान पर शराब पी रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के कब्जे से शराब, खाली बोतल, डिस्पोजल गिलास एवं अन्य सामग्री जब्त की गई तथा मेडिकल परीक्षण में शराब सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद नियमानुसार गिरफ्तारी एवं वैधानिक कार्रवाई की गई।
*थाना प्रभारी ने दिया जांच का आश्वासन*
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी श्रद्धा पाठक ने ग्रामीणों से प्राप्त आवेदन स्वीकार कर लिया है। उन्होंने शिकायत में नामजद दिलीप राउत, राजेश कुमार साहू सहित अन्य दो पुलिसकर्मियों के संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर जांच कराने एवं तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं पुलिस का कहना है कि शिकायत की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब पूरे मामले पर लोगों की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। एक ओर पुलिस कार्रवाई को वैधानिक बता रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इसे पुलिस की ज्यादती बताते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल वैधानिक कार्रवाई का था या शिकायतकर्ताओं के आरोपों में भी दम है।



