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बुलडोजर ऐक्शन

अनोखा बुलडोजर एक्शन सुशासन तिहार की अनूठी पहल ओरमा सरपंच ने अपने पति व ससुर के जमाने के 30 साल पुराने अतिक्रमण पर चलवा दिया बुलडोजर 

सह संपादक - एम डी युसुफ खान Ⓜ️ 9179799491

 

 

बालोद // 05 जून 2026 

आमतौर पर जब सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की बात आती है तो लोग रसूख, राजनीति और कोर्ट कचहरी के नोटिस का सहारा लेकर सालों साल मामले को लटकाए रखने हैं । लेकिन बालोद जिला मुख्यालय से महज 3 किलोमीटर दूर ग्राम मेड़की (ओरमा) में एक ऐसा वाक्य सामने आया है जिसने सुशासन की नई और बेमिसाल परिभाषा लिख दी है ।

 

 

 मामला क्या है जाने 

 

सीमांकन की रिपोर्ट आते ही यह बात साफ हो गई कि अतिक्रमित भूमि किसी और की नहीं, बल्कि सरपंच मंजूलता साहू के पति परस राम साहू के हिस्से में आ रही है। जैसे ही सरपंच को इसकी भनक लगी, उन्होंने बिना किसी प्रशासनिक दबाव या नोटिस का इंतजार किए, तुरंत कड़ा फैसला लिया।

26 मई से 4 जून के बीच, सरपंच मंजूलता साहू ने खुद मौके पर खड़े रहकर बुलडोजर लगवाया और अपने ही परिवार के कब्जे वाले हिस्से को जमींदोज कर दिया।

 

नियम सबके लिए बराबर” – क्या कहा जिम्मेदारों ने?

सरपंच मंजूलता साहू का दो टूक बयान:

“शिकायतकर्ता रोहित साहू की शिकायत बिल्कुल सही थी। नियमतः शासकीय भूमि को खाली होना ही चाहिए, क्योंकि शासन के भी कड़े निर्देश हैं। यह जमीन मेरे ससुर स्वर्गीय फूल सिंह साहू ने 35 साल पहले खरीदी थी, तब से हमारा परिवार काबिज था। लेकिन आज मैं इस गांव की सरपंच हूँ, इसलिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मैंने खुद पहल कर अतिक्रमण हटाया है। अब प्रशासन को चाहिए कि गांव के बाकी सभी अतिक्रमणों पर भी ऐसी ही निष्पक्ष कार्रवाई करे।”

भूमि स्वामी (पति) परस साहू का पक्ष:

“पटवारी ने सीमांकन में जो जगह चिन्हित की थी, हमने उसे सहर्ष खाली कर दिया है। अगर शिकायतकर्ता अभी भी संतुष्ट नहीं है, तो वह दोबारा सरकारी सीमांकन करवा सकता है, हमें कोई आपत्ति नहीं है।”

 

 

पूरे क्षेत्र में हो रही है तारीफ

 

अमूमन देखा जाता है कि दशकों पुराने कब्जों को हटाने के लिए तहसील न्यायालय से दर्जनों नोटिस जारी होते हैं, स्थगन (स्टे) लिए जाते हैं और अंत में राजनीतिक रसूख आड़े आ जाता है। लेकिन यहाँ की

तस्वीर जुदा थी:

 

बिना नोटिस की कार्रवाई: सरपंच ने किसी कानूनी मजबूरी का इंतजार नहीं किया।

 

मिसाल पेश की: ‘पहले खुद सुधरो, फिर दुनिया को सुधारो’ की नीति पर चलते हुए अपने ही घर से शुरुआत की।

यही वजह है कि इस अनोखे ‘बुलडोजर एक्शन’ ने बालोद जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। लोग कह रहे हैं—कि “सरपंच हो तो मंजूलता साहू जैसी!

 

 

 

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