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शिक्षकों ने टीईटी मुक्त रैली निकालकर शासन के समक्ष अपनी विभिन्न मांगे रखी 

संपादक -- एम डी युसुफ खान --- Ⓜ️ 9179799491

 

 

गुंडरदेही 26 अगस्त 2026 

 

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में बालोद जिले में शिक्षकों का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं ने ‘टीईटी मुक्ति रैली’ निकालकर शासन के सामने अपनी विभिन्न मांगें रखीं। शिक्षकों ने बैनर, झंडे और टोपी के साथ प्रदर्शन करते हुए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की।

 

रैली के बाद शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव एवं डीपीआई के नाम कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

 

28 साल की सेवा के बाद भी टीईटी क्यों?

 

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए अब टीईटी की अनिवार्यता का प्रावधान उनके भविष्य और सेवा सुरक्षा को प्रभावित करने वाला है। शिक्षकों का सवाल था कि जब शिक्षक वर्षों का सेवा अनुभव रखते हैं, तो इतने लंबे सेवाकाल के बाद भी टीईटी को अनिवार्य क्यों किया जा रहा है?

 

पदोन्नति में वरिष्ठता को आधार बनाने की मांग

 

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक दिलीप साहू एवं जितेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। ज्ञापन में कहा गया कि 17 अगस्त 2012 के नियम के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया है। इसके पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति देने की मांग की गई।

 

वहीं 17 अगस्त 2012 के बाद सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा शिक्षक हितों की रक्षा करने की मांग भी रखी गई।

 

पूर्व सेवा की गणना और पूर्ण पेंशन की मांग

 

शिक्षकों ने संविलियन से पहले की सेवा अवधि को पेंशन के लिए गणना में शामिल करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि शिक्षकों ने संविलियन से पहले भी वर्षों तक सेवा दी है, इसलिए उस सेवा अवधि को पेंशन लाभ के लिए मान्यता दी जानी चाहिए।

 

वेतन विसंगति दूर करने की मांग

 

ज्ञापन में शिक्षकों ने वेतन विसंगति दूर करने तथा केंद्रीय वेतनमान के आधार पर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का वेतन निर्धारण करने की मांग की।

 

इसके साथ ही 13 फरवरी 2026 के नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम में मौजूद विसंगतियों को दूर करने अथवा नियम को निरस्त करने की मांग भी रखी गई।

 

बीएड के लिए विभागीय ब्रिज कोर्स की मांग

 

प्रशिक्षित सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं को बीएड से संबंधित आवश्यकताओं के लिए विभागीय स्तर पर ब्रिज कोर्स कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

 

मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

 

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक लंबे समय से अपनी मांगों को शासन के समक्ष रखते आ रहे हैं। यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे की रणनीति के अनुसार आंदोलन और प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा।

 

हजारों शिक्षक हुए शामिल

प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक दिलीप साहू, जितेन्द्र शर्मा, बीरबल देशमुख, अमित सिन्हा, रामकिशोर खरांशु, कामता प्रसाद साहू, अजय लड्ढा, शिव शांडिल्य, वीरेन्द्र देवांगन, खेमन साहू, पवन जोशी, द्वारिका भारद्वाज, नीलेश देशमुख, कांतु राम चंदेल, नरेंद्र साहू, खिलेश्वर गंजीर, पवन कुम्भकार, हरीश कुमार साहू, शैलेन्द्र साहू, शिवेंद्र बहादुर साहू, महेंद्र टांडिया, शेषलाल साहू, राजेश चंद्राकर, संजय ठाकुर, रवींद्र नाथ योगी, संतोष देवांगन, धीराज सिंह कस्तुरे, भूपेंद्र पांडेय, अरविंद सोनी, जगत राम साहू, किशन साहू, रिखी ध्रुव सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे।

 

इसके अलावा गुंडरदेही ब्लॉक संयोजक राजेंद्र देशमुख, गुरूर ब्लॉक संयोजक सूरज गोपाल गंगबेर, विक्रम राजपूत, डौंडी ब्लॉक संयोजक गजेंद्र रावटे, डौंडीलोहारा ब्लॉक संयोजक अविनाश साहू तथा बालोद ब्लॉक संयोजक अंजुलता योगी सहित मोर्चा के पदाधिकारी एवं प्रभावित शिक्षक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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