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रोजगार दिवस पर गूंजा मजदूरी का मुद्दा

रोजगार दिवस पर गूंजा मजदूरी भुगतान का मुद्दा

मनरेगा श्रमिकों को समय सीमा में भुगतान सुनिश्चित करने की उठाई मांग

 

 

अंडा // दुर्ग 

 

प्रत्येक माह की 7 तारीख को आयोजित होने वाले ‘रोजगार दिवस’ के दौरान मनरेगा श्रमिकों की समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं। निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों ने जनपद सदस्य ढालेश साहू के समक्ष मजदूरी भुगतान में हो रही देरी को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की।

 

श्रमिकों ने बताया कि भीषण गर्मी में लगातार कार्य करने के बावजूद उन्हें निर्धारित समय सीमा में मजदूरी राशि प्राप्त नहीं हो पा रही है। भुगतान में देरी के कारण परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट की स्थिति निर्मित हो रही है। ग्रामीणों ने शासन के नियमानुसार 15 दिनों के भीतर मजदूरी राशि सीधे बैंक खातों में जमा कराने की मांग की।

 

 

जनपद सदस्य ढालेश साहू ने श्रमिकों की मांगों का किया समर्थन* महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत श्रमिकों को समय सीमा में मजदूरी भुगतान करना शासन की कानूनी जिम्मेदारी है। मनरेगा अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुसार कार्य पूर्ण होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी भुगतान किया जाना अनिवार्य है। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होना श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन है तथा इससे शासन की योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का विश्वास प्रभावित होता है।

 

उन्होंने लंबित मस्टर रोल एवं एफटीओ की स्थिति की समीक्षा कर भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। साथ ही प्रशासन से तकनीकी समस्याओं के स्थायी समाधान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि भविष्य में श्रमिकों को इस प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

 

 

सह संपादक एम डी युसुफ खान

अंडा – दुर्ग

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