अपने शिक्षकीय जीवन में बच्चों के शिक्षा पर विशेष जोर देने वाले शिक्षक दुलाराम देवांगन हुए सेवानिवृत्त

उतई। शासकीय प्राथमिक शाला पुरई में पदस्थ प्रधान पाठक श्री दुलाराम देवांगन जी आज 31 मई को सेवा निवृत्त हो रहे है । देवांगन सर इस स्कूल में 23 जुलाई 2010 से पदस्थ थे।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी देवांगन सर जी किसी परिचय के मोहताज नहीं है ।वे ईमानदारी ,अनुशासन और कर्तव्य परायण के लिए जाने जाते है ।उन्होंने अपने शिक्षकीय जीवन में बच्चों के शिक्षा पर विशेष जोर दिया ।अपने स्टाफ और ग्राम वासियों के सहयोग से स्कूल और बच्चों के विकास में भागीरथी बने ।
श्री दुलाराम देवांगन जी का जन्म 10 मई 1963 को गुण्डरदेही विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम गुरेदा में हुआ । सर के पिता श्री कुशाल सिंह देवांगन एवं माता श्रीमती सोनकुंवर देवांगन थी । सर का बचपन गांव में बीता । उन्हें आज भी तान्दुला नदी में बचपन के दोस्तो के साथ डुबकी लगाने नदी को तैर कर पार करने की सुनहरी यादें याद है ।हॉयर सेकेंडरी 1983 में पास होने के बाद सर शिक्षक के पद पर 31 जनवरी 1984 गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम हरणसिंधी के प्राथमिक शाला में प्रथम नियुक्ति हुई।एक जुलाई 1988 से 30 जून 1990 तक डाइट बेमेतरा में प्रशिक्षण लिए। 1990 से 2008 तक गुण्डरदेही के परसदा स्कूल में सेवा दिए ।अक्टूबर 2008 से 22जुलाई 2010 तक प्राथमिक शाला अंजोरा डेयरी फॉर्म में सेवा दी। 23 जुलाई 2010 से 31 मई 2025 तक प्राथमिक शाला पुरई में कार्यरत रहे । पुरई के प्राथमिक शाला में सर ने 15 साल कार्य किया। उन्हें गांव के हर बच्चे और उनके माता पिता नाम से कार्य से पहचानते है । पालकों से उनका संपर्क हमेशा रहा ।बच्चों से लगाव स्नेह और शिक्षा गुणवत्ता के फलस्वरूप देवांगन सर को शिक्षा विभाग ने सन 2020 में उत्कृट प्रधान पाठक सम्मान से अलंकृत किया ।आज देवांगन सर इस पद से और शिक्षा विभाग से सेवा निवृत्त हो गए। सर के बेटा बहु नाती पोता से भरापुरा परिवार दुर्ग में रहते है ।



