24 अगस्त को महान क्रांतिकारी सुखदेव राज की मूर्ति का अनावरण समारोह
मुख्य अतिथि के रुप में विधानसभा अध्यक्ष डा रमन सिंह होंगें शामील

दुर्ग। 21अगस्त 2026
स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के निकट सहयोगी रहे सुखदेव राज की प्रतिमा का अनावरण सोमवार 24 अगस्त को छत्तीसगढ़ के जिला मुख्यालय दुर्ग में किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की दुर्ग जिला इकाई द्वारा किया जा रहा है । उक्त जानकारी पेंशनर्स महासंघ ने दी है।
प्रतिमा अनावरण समारोह दोपहर 2.30 बजे दुर्ग शहर के गौरव पथ स्थित बालाराम जोशी शासकीय आदर्श कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक दुर्ग और प्रदेश के स्कूल शिक्षा और विधि मंत्री गजेन्द्र यादव करेंगे। समारोह में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल, अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार तथा भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। पेंशनर्स महासंघ के दुर्ग जिला अध्यक्ष बी.के. वर्मा और महामंत्री पी.आर. साहू ने समारोह में अधिक से अधिक संख्या में नागरिकों, पेंशनरों सामाजिक संगठनों एवं युवाओं की सहभागिता का आव्हान किया है।
क्रांतिकारी इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ी सुखदेव राज
सुखदेव राज उन क्रांतिकारियों में शामिल थे जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। वे अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के निकट सहयोगी थे । सुखदेव राज ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय छत्तीसगढ़ के दुर्ग क्षेत्र में बिताया। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार उन्होंने दुर्ग जिले के अंडा ( कुथरेल) क्षेत्र में भी लंबे समय तक जीवन व्यतीत किया था। सुखदेव राज का नाम अक्सर अमर शहीद सुखदेव थापर के साथ भ्रमित किया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग क्रांतिकारी थे।
सुखदेव राज का संबंध चंद्रशेखर आजाद और भगवतीचरण वोहरा जैसे महान क्रांतिकारियों से रहा था। उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास उनके प्रतिमा अनावरण समारोह का उद्देश्य है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के उन क्रांतिकारियों के बारे में जानने का अवसर देते हैं, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में अपेक्षाकृत कम चर्चा में आया।