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अल। नीनो का प्रभाव

अल-नीनो का प्रभाव, किसानों को कृषि कार्य हेतु एडवाइजरी जारी

वर्तमान में कम वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए धान की सीधी बुआई को प्राथमिकता दें।

 

बलौदाबाजार, 30 जून 2026

 

संचालनालय कृषि, छत्तीसगढ़ द्वारा भारत मौसम विज्ञान विभाग के अल-नीनो प्रभाव संबंधी पूर्वानुमान को दृष्टिगत रखते हुए किसानों के लिए कृषि कार्य संबंधी आवशयक एडवाइजरी जारी की गई है। किसानो से अपील की है कि अल-नीनो की परिस्थितियों को देखते हुए कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों तथा किस्मों का चयन करें, जिससे वर्षा की अनिश्चितता पर प्रभाव कम हो।

 

वर्तमान में कम वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए धान की सीधी बुआई को प्राथमिकता दें। रोपा खेती में अधिक पानी एवं लागत की आवश्यकता होती है तथा फसल पकने में अतिरिक्त समय लगता है। धान की सीधी बुआई (सी.एस.आर.) विधि से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है। फसल की कास्त लागत लगभग 5000 रूपये प्रति एकड़ कम होती है, तथा फसल 12 से 15 दिन पहले पक जाती है। उच्चहन भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहनी फसलें जैसे अरहर, मूंग एवं उड़द तथा तिलहनी फसलें जैसे मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन की खेती अपनाएं। फसलों की बुवाई कतार पद्धति से करें। इससे खरपतवार नियंत्रण, पौधे की उचित वृद्धि एवं नमी संक्षण में सहायता मिलती है। सभी फसलों के बीजों का बुवाई पूर्व फफूंदनाशी-कार्बन्डाजिन 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, वष्टिनाशी थायमेथोक्सान, इमिडाक्लोप्रिड-1.5 मि.ली. प्रति किलोग्राम बीज, जैव उर्वरक धान हेतु एजोरिपरित, अन्य फसलों हेतु एजोटोबैक्टर तथा दलहनी फसली हेतु राइजीनियम का अवश्य उपयोग करें। यदि बुवाई के पश्चात् 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो पुनः बुवाई करें तथा सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग करें। जुलाई माह के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई पूर्ण कर लें। अगस्त माह में तिल, सूरजमुखी राठा मध्यम अवधि पाली अरहर की बुवाई की जा सकती है। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण हेतु अनुशंसित खरपतवारनाशी का प्रयोग करें, जिससे मिट्टी में नमी का संरक्षण बना रहे। आवश्यक्तानुसार फसलों में मल्चिंग का उपयोग करें। इससे भूमि की नमी संरक्षित होती है तथा फसलें सूखे के प्रभाव से सुरक्षित रहती हैं। गांव के नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाएं तथा वर्षा जल का संचयन करें। कम वर्षा की स्थिति में नत्रजन उर्वरकों का उपयोग सीमित मात्रा में करें। इसके स्थान पर 2 प्रतिशत पुरिया घोल का छिड़काव अधिक लाभकारी रहेगा अथवा एक एड़क में 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करें। कृषि कार्यों की कठिनाईयों एवं समस्याओं के निराकरण के लिए अपने निकट स्थित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क कर सकते हैं।

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